मंगलवार 7 जुलाई 2026 - 20:15
अलविदा ऐ हमारे शहीद नेता, अलविदा!

आज का वातावरण शोकमग्न है। हवाएँ भी उदास हैं और अपनी गति भूलकर धीरे-धीरे चल रही हैं, मानो वे भी इस महान बिछोह पर मातम कर रही हों। आकाश पर उदासी के बादल छाए हुए हैं और धरती पर गहरी खामोशी की एक भारी चादर बिछी हुई है।

लेख: ग़ुलाम शबर, जामेअतुल मुस्तफ़ा

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी | आज का वातावरण शोकमग्न है। हवाएँ भी उदास हैं और अपनी गति भूलकर धीरे-धीरे चल रही हैं, मानो वे भी इस महान बिछोह पर मातम कर रही हों। आकाश पर उदासी के बादल छाए हुए हैं और धरती पर गहरी खामोशी की एक भारी चादर बिछी हुई है।

अस्तित्व का प्रत्येक अंग दुःख के बोझ तले दबा हुआ है। दिल की हर धड़कन एक आह बन चुकी है, साँसें मानो ग़म के सीने में उलझ गई हों और आँखें इतने आँसुओं की भेंट चढ़ चुकी हैं कि सामने के दृश्य धुंधले हो गए हैं। होंठ काँप रहे हैं, लेकिन ज़बान पर ऐसी खामोशी छा गई है कि शब्द जन्म लेने से पहले ही सिसकते हुए दम तोड़ देते हैं। ऐसा लगता है जैसे दुःख और पीड़ा ने आत्मा को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया हो और समय भी इस वियोग के क्षण पर ठहरकर शोक मना रहा हो।

क्या कहा जाए, जब हर भावना दिल के खून में डूबी हो, हर दुआ एक आह बन गई हो और हर आशा बिछड़ने की दहलीज़ पर सिर झुकाए खड़ी हो? ऐसे समय दिल की गहराइयों से केवल एक ही पुकार उठती है—एक ऐसी पुकार जिसमें बेबसी भी है, प्रेम भी है और हमेशा के लिए बिछड़ जाने का दर्द भी...

अलविदा! ऐ प्रिय व्यक्तित्व, अलविदा! अलविदा ऐ शहीद नेता, अलविदा! अब खामोशियाँ ही आपका पता देंगी और यादें ही आपका नाम लेकर हमें रुलाती रहेंगी।

आज हम ऐसे नेता को विदा कर रहे हैं जिसने केवल एक राष्ट्र का मार्गदर्शन नहीं किया, बल्कि दिलों को साहस, विचारों को चेतना और कदमों को दृढ़ता प्रदान की। ऐसा महसूस होता है मानो समय कुछ क्षण के लिए ठहर गया हो और हर दिल अपने उपकारी के बिछड़ने पर मौन शोक मना रहा हो।

आपका स्नेह एक पिता के समान था। आपकी बुद्धिमत्ता एक उज्ज्वल दीपक की तरह हमारे मार्ग को प्रकाशित करती रही। आपकी सीख ने हर कठिन मोड़ पर हमारा मार्गदर्शन किया। आपके दूरदर्शी वक्तव्यों ने राष्ट्रों को जागृत किया, आपकी दुआएँ हमारे लिए जीवन की पूँजी बन गईं। आपकी दूरदृष्टि ने आने वाले खतरों को बहुत पहले ही पहचान लिया था और आपकी भविष्यवाणियाँ समय के साथ एक-एक करके सच साबित होती गईं। आपने हमें केवल परिस्थितियों का विश्लेषण करना ही नहीं सिखाया, बल्कि उन्हें बदलने का साहस भी दिया। आपकी ज़बान से निकला हर शब्द हमारे लिए आशा, विश्वास और भरोसे का संदेश बन जाता था।

आपने हमें हमेशा यह विश्वास दिलाया कि "हम कर सकते हैं" केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवंत आस्था और स्थायी सत्य है। आपने कहा कि यदि कोई राष्ट्र अपने पालनहार पर भरोसा करे, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखे और निरंतर प्रयास करता रहे, तो उसके लिए कोई मंज़िल दूर नहीं रहती। आज हम गवाही देते हैं कि आपने जो कहा, समय ने उसकी पुष्टि की। जिन खतरों से आपने सावधान किया, वे सामने आए और जिन सफलताओं का रास्ता आपने दिखाया, अल्लाह की कृपा से राष्ट्र ने उनकी झलक भी देखी। चाहे ज्ञान का क्षेत्र हो, उद्योग, रक्षा, आत्मनिर्भरता, संस्कृति या राष्ट्रीय सम्मान—हर क्षेत्र में आपकी सोच ने हमें आगे बढ़ने का साहस दिया और सफलता का मार्ग दिखाया।

आज जब आपका जनाज़ा हमारे बीच है, तो दिल बार-बार यही प्रश्न करता है कि अब वह पितृसुलभ स्नेह कहाँ मिलेगा? वह बुद्धिमत्तापूर्ण मार्गदर्शन किससे सुनने को मिलेगा? वह आशा जगाने वाली आवाज़, ईमान को ताज़ा कर देने वाले भाषण, दूरदर्शी संदेश और विवेकपूर्ण निर्णय अब किसकी ज़बान से सुनने को मिलेंगे? दिल इस बिछोह पर बार-बार आँसू बहाता है, लेकिन उसी क्षण आस्था और विश्वास यह सांत्वना भी देते हैं कि अल्लाह अपने नबी की उम्मत को असहाय नहीं छोड़ता। जब वह किसी महान नेता को अपने पास बुला लेता है, तो अपनी कृपा से उसका योग्य उत्तराधिकारी भी प्रदान करता है, ताकि मार्गदर्शन, दृढ़ता और नेतृत्व का सफ़र रुकने के बजाय उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ता रहे।

इसी विश्वास के साथ आज हम आपको सुपुर्द-ए-ख़ाक करने के लिए विदा कर रहे हैं, लेकिन निराश नहीं हैं। हम अल्लाह के इस उपकार के लिए उसके आभारी हैं कि उसने हमें एक नया नेता प्रदान किया है। हमारी नज़रों में आपका प्रेम, आपकी महानता और आपका स्थान सदैव बना रहेगा। हमारे दिल इस संकल्प को दोहराते हैं कि जिस मिशन, जिस विचार, जिस मार्ग और जिस ध्वज को आपने ऊँचा उठाया, उसी पर हम अपने नए नेता के नेतृत्व में दृढ़ता से चलते रहेंगे। यही आपके प्रति सच्ची निष्ठा है, यही आपकी शिक्षाओं की माँग है और यही हमारी दुआ भी है कि अल्लाह तआला इस मार्गदर्शन और नेतृत्व की श्रृंखला को इमाम ज़माना (अ) के ज़ुहूर होने तक अपनी सहायता और कृपा से कायम और स्थायी रखे।

(आमीन)

अलविदा ऐ शहीद नेता, अलविदा!

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